दिल मे कुछ भाव उमड़े और जब कौतूहल बढ़ा तो ब्लॉग लिखना शुरू कर दिया । ये सिलसिला अभी तक तो बद्दस्तूर जारी है। जब भी कुछ नया या पुराना कोई किस्सा दिल मे हलचल पैदा कर बैचेनी बढाने लगता है तो उसे लिखकर कुछ शुकुन हासिल होता है। मगर कभी खुद ही यादों की राख़ टटोलकर चिंगारी खोंजने की नाकाम कोशिश करता हूँ। बस यही फलसफा है ।
तनहाई में अक्सर यादों के पन्ने पलटने का मन करता है । छोटीसी रचना में बड़ी बात कह डाली ।
ReplyDeleteWaah...Bahut Umda....
ReplyDeleteबहुत बेहतरीन...
ReplyDeleteवाह ! शानदार !!
ReplyDeleteयादों की स्याही कुछ उके देती है अतीत से और बुनने लगती है नई कहानी फिर से ...
ReplyDeleteभावमय ...
बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना...
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